साउथ सिनेमा में एक और नया नाम जुड़ चुका है – किरिति। जी हां, “जूनियर” नाम की इस फिल्म से एक नए एक्टर ने डेब्यू किया है। लगभग 2 घंटे 30 मिनट की इस फिल्म को देखने के बाद मिला-जुला अनुभव रहा। जहां किरिति की एक्टिंग, डांस और फाइटिंग स्किल्स काफी इम्प्रेसिव लगीं, वहीं फिल्म की स्टोरीलाइन उतनी ही आउटडेटेड और रिपीटेटिव महसूस हुई।
किरिति की धमाकेदार परफॉर्मेंस
अगर आप एक्टिंग, डांस और फाइट्स के शौकीन हैं तो आपको किरिति जरूर पसंद आएंगे। ये उनकी डेब्यू फिल्म जरूर है, लेकिन एक्सप्रेशन से लेकर एक्शन और इमोशनल सीन्स तक हर सीन में उन्होंने कमाल किया है। खासकर डांस मूव्स इतने पावरफुल हैं कि टॉप डांसर्स को टक्कर दे सकते हैं। कई स्टेप्स इतने यूनीक हैं कि सोशल मीडिया पर वायरल भी हो चुके हैं।
डीएसपी का म्यूजिक है फिल्म की जान
म्यूजिक डायरेक्टर डीएसपी ने फिल्म में जान डाल दी है। खासकर पहला सॉन्ग और वायरल हो चुका “वैयारी सॉन्ग” ऑडियंस को थिरकने पर मजबूर कर देता है। गानों की कोरियोग्राफी भी शानदार है।
फिल्म की कमजोर कड़ी: स्क्रिप्ट और स्टोरी
अब बात करें फिल्म की कमजोरियों की तो सबसे बड़ा माइनस पॉइंट है इसकी स्क्रिप्ट। फिल्म की कहानी कई पुरानी फिल्मों से उठाई हुई लगती है – जैसे महर्षि, श्रीमंतुडु, एमसीए, बोंम्मरिल्लु और मिर्ची जैसी फिल्मों के मिक्स पैकेज की तरह। हर सीन रियलिटी से बहुत दूर लगता है और ऑडियंस का कनेक्शन टूट जाता है।
फिल्म में लव स्टोरी, इमोशन, फैमिली ड्रामा, एक्शन, मैसेज – सब कुछ है, लेकिन ये सभी एलिमेंट्स जबरन डाले गए लगते हैं। ऐसा लगता है जैसे सिर्फ चेकलिस्ट पूरी करनी हो, न कि एक स्ट्रॉन्ग और नैचुरल स्टोरी बतानी हो।
जेनेलिया और श्रीलीला का कम इस्तेमाल
जेनेलिया फिल्म में एक खास रोल में नजर आती हैं, लेकिन उनका रोल लिमिटेड ही रहता है। श्रीलीला का रोल तो ऐसा है मानो सिर्फ प्रमोशन के लिए ही उन्हें लिया गया हो। उनके किरदार का फिल्म की कहानी से ज्यादा लेना-देना नहीं दिखता।
दूसरा हाफ है निराशाजनक
इंटरवल तक फिल्म थोड़ी इंटरेस्टिंग लगती है, लेकिन सेकंड हाफ में पूरा फ्लो बिगड़ जाता है। इमोशनल डेप्थ की कमी, सीन का ओवरडोज और कई ऐसे सीक्वेंस जो रियलिटी से बहुत दूर हैं – जैसे ऑफिस में डायरेक्ट सीईओ से मिलना, कॉलेज में ऑफर लेटर बांटना, बिना लॉजिक के लव ट्रैक – ये सब फिल्म को कमजोर बनाते हैं।
फाइनल वर्डिक्ट
अगर आप सिर्फ एक नए हीरो की परफॉर्मेंस, डांस और डीएसपी के म्यूजिक के लिए फिल्म देखना चाहते हैं तो एक बार ट्राय कर सकते हैं। लेकिन अगर आप एक स्ट्रॉन्ग और यूनिक स्टोरी की उम्मीद कर रहे हैं तो शायद ये फिल्म आपको निराश कर दे।
रेटिंग: 2.5/5
फिल्म सिनेमाघर में देखने लायक है या ओटीटी पर – ये पूरी तरह से आपकी पसंद पर निर्भर करता है। किरिति ने जरूर उम्मीद जगाई है, लेकिन उन्हें एक बेहतर स्क्रिप्ट की जरूरत है जिससे उनका टैलेंट और निखर कर सामने आए।