उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कंटेंट के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। 25 जुलाई 2025 को शाम के वक्त मुरादाबाद जिले के पाकबड़ा थाना क्षेत्र के हाशमपुर गांव से एक प्रसिद्ध YouTuber मोहम्मद आमिर को गिरफ्तार किया गया। आमिर का आरोप है कि उसने सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कंटेंट अपलोड किया था, जिससे हिंदू समाज के लोगों में आक्रोश फैल गया।
कौन हैं मोहम्मद आमिर?
मोहम्मद आमिर एक लोकप्रिय YouTuber हैं, जिनके चैनल TRT (Top Real Team) के लगभग 58 लाख सब्सक्राइबर्स हैं। इसके अलावा, इंस्टाग्राम पर उनके 50 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। आमिर की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण उनका विवादास्पद और शॉर्ट वीडियो कंटेंट रहा है, लेकिन हाल ही में अपलोड किया गया एक वीडियो उनकी गिरफ्तारी की वजह बन गया।
क्या है मामला?
25 जुलाई 2025 को पाकबड़ा थाना में दीपक कश्यप नामक व्यक्ति ने एफआईआर दर्ज करवाई। दीपक ने शिकायत में बताया कि TRT चैनल पर लगातार हिंदू देवी-देवताओं, साधु-संतों और धार्मिक प्रतीकों का मजाक उड़ाया जा रहा है। खास तौर पर एक वीडियो का उल्लेख किया गया, जिसमें आमिर साधु के वेश में गाली-गलौज करता हुआ दिखाई देता है। यह वीडियो वायरल हो चुका था और इसे 1.1 करोड़ (11 मिलियन) से भी ज्यादा लोगों ने देखा था।
आमिर पर कौन-कौन सी धाराएं लगीं?
पुलिस ने आमिर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 और आईटी अधिनियम 2008 की धाराओं में मामला दर्ज किया है:
- BNS धारा 197: किसी धर्म या समुदाय की भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाना
- BNS धारा 3532: अशांति फैलाने वाली सामग्री का प्रसार
- BNS धारा 352: जानबूझकर किसी का अपमान करना
- आईटी एक्ट की धारा 67: अश्लील या आपत्तिजनक सामग्री को इंटरनेट पर डालना
इन धाराओं के तहत आमिर को गिरफ्तार कर पाकबड़ा थाने ले जाया गया, जहां आगे की पूछताछ की गई और फिर जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई।
वीडियो का असर और पुलिस की प्रतिक्रिया
वीडियो के वायरल होने के बाद आम जनता ने भारी नाराजगी जताई और पुलिस से तुरंत कार्रवाई की मांग की। पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम ने इस चैनल की गहनता से जांच की। पुलिस ने साफ तौर पर कहा है कि न सिर्फ वीडियो बनाने वाले, बल्कि ऐसे वीडियो को शेयर करने वाले और प्रचारित करने वाले लोगों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
इससे पहले 17 जुलाई 2025 को यूपी के संभल जिले में चार लड़कियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनके नाम हैं – महक, परी, हिना और जर्रार आला। इन पर भी सोशल मीडिया पर अश्लील और आपत्तिजनक वीडियो कंटेंट बनाकर अपलोड करने का आरोप लगा था। इनके खिलाफ भी आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत कार्रवाई की गई थी।
पुलिस की चेतावनी
पाकबड़ा थाना पुलिस ने साफ कहा है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। थाना प्रभारी ने कहा,
“हमारी सोशल मीडिया टीम पूरी तरह एक्टिव है। जो भी व्यक्ति सोशल मीडिया पर धार्मिक, सामाजिक या नैतिक रूप से आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। चाहे वह वीडियो हो, ऑडियो या टेक्स्ट – कुछ भी बख्शा नहीं जाएगा।”
क्या यह एक चेतावनी है?
इस घटना से यह साफ हो गया है कि अब सोशल मीडिया की आज़ादी के नाम पर धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना, गाली-गलौज या आपत्तिजनक वेशभूषा में एक्ट करना सिर्फ लोकप्रियता नहीं बल्कि गिरफ्तारी का कारण भी बन सकता है। पुलिस और प्रशासन अब सोशल मीडिया की निगरानी को लेकर गंभीर हो चुके हैं।
जनता की जिम्मेदारी भी जरूरी
यह केवल वीडियो बनाने वालों की नहीं बल्कि उन्हें देखने, लाइक करने और शेयर करने वालों की भी जिम्मेदारी है कि वे ऐसा कोई कंटेंट न फैलाएं जो समाज में नफरत, अशांति या धार्मिक टकराव को बढ़ावा दे। सोशल मीडिया एक सशक्त माध्यम है, लेकिन इसका दुरुपयोग समाज के लिए खतरे की घंटी है।