भारत और इंग्लैंड के बीच चल रही पांच टेस्ट मैचों की सीरीज़ का पांचवां और आखिरी मुकाबला टीम इंडिया के लिए अच्छी शुरुआत नहीं लेकर आया। पहले दिन का खेल खत्म होते ही यह साफ हो गया कि भारत इस मुकाबले में शुरुआत से ही दबाव में है। टीम के टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों से जिस प्रदर्शन की उम्मीद थी, वह पूरी तरह नाकाम रहा।
सबसे पहले यशस्वी जैसवाल की बात करें तो ओपनिंग में केवल 2 रन बनाकर आउट हो गए। पिछले कुछ मुकाबलों में उनका प्रदर्शन गिरता जा रहा है। इस सीरीज़ में उन्होंने सिर्फ एक शतक और एक अर्धशतक लगाया है जबकि बाकी पारियों में उनका बल्ला शांत रहा। पिछली पांच पारियों में उन्होंने कुल मिलाकर लगभग 70-75 रन ही बनाए हैं जो किसी भी टॉप ऑर्डर बल्लेबाज़ के लिए चिंता का विषय है।
केएल राहुल, जिन्होंने सीरीज़ में अब तक अच्छा खेल दिखाया था, इस मैच में खास योगदान नहीं दे सके। उन्होंने सिर्फ 14 रन बनाए और जल्दी आउट हो गए। एक अनुभवी बल्लेबाज़ से ऐसे समय में बड़ी पारी की उम्मीद थी, लेकिन वह उसे निभा नहीं पाए।

साईं सुदर्शन को बार-बार मौके दिए जा रहे हैं लेकिन उनका प्रदर्शन अब तक औसत ही रहा है। इस मुकाबले में उन्होंने 38 रन बनाए, लेकिन यह पारी किसी भी मैच का रुख बदलने में नाकाफी है। लगातार तीन टेस्ट खेलने के बाद भी वह एक भी प्रभावशाली पारी नहीं खेल पाए हैं। जब टॉप ऑर्डर बिखरता है, तो जरूरी होता है कि कोई बल्लेबाज टिक कर लंबी पारी खेले, लेकिन साईं सुदर्शन ने वैसी प्रतिबद्धता अब तक नहीं दिखाई है।
रविंद्र जडेजा जो पिछले मैच के हीरो रहे थे, इस बार बल्ले से कुछ खास नहीं कर सके और सिर्फ 9 रन बनाकर आउट हो गए। जब टीम संकट में हो, तब जडेजा जैसे खिलाड़ी से टीम को संभालने की उम्मीद होती है लेकिन वह भी नाकाम रहे।
टीम इंडिया के इस प्रदर्शन से साफ नजर आता है कि बल्लेबाजों में आत्मविश्वास की कमी थी और वे इंग्लैंड के गेंदबाजों की रणनीति में उलझ गए। अब सारा दारोमदार लोअर ऑर्डर और गेंदबाजी पर है लेकिन बार-बार निचले क्रम से चमत्कार की उम्मीद करना भी व्यावहारिक नहीं है। इंग्लैंड ने पहले दिन गेंदबाजी में सटीकता दिखाई और भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

फिलहाल जो स्थिति है, उसमें भारत को वापसी के लिए असाधारण प्रयास करने होंगे। पहले दिन के बाद इंग्लैंड का पलड़ा भारी है लेकिन अगर भारत को मैच में बने रहना है तो दूसरे दिन बल्लेबाजों को एकजुट होकर जिम्मेदारी से खेलना होगा। गेंदबाजों को भी यह दिखाना होगा कि वे मैच को पलट सकते हैं। सीरीज में टीम इंडिया ने कई बार वापसी की है, तो इस बार भी उम्मीद बाकी है, लेकिन इसके लिए आत्मविश्लेषण और साहसिक रणनीति की जरूरत होगी।