भारतीय क्रिकेट टीम के मौजूदा मुख्य कोच और पूर्व स्टार क्रिकेटर गौतम गंभीर को सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दरअसल, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की उस कार्यवाही पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें गंभीर, उनके फाउंडेशन और अन्य लोगों के खिलाफ कोविड-19 दवाओं के अवैध भंडारण और वितरण से जुड़े मामले की सुनवाई चल रही है।
गंभीर और उनके फाउंडेशन पर आरोप है कि कोरोना महामारी के दौरान जब लोग ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाओं के लिए भटक रहे थे, तब उनके फाउंडेशन द्वारा कथित तौर पर दवाओं का अवैध स्टॉक किया गया और फिर इन्हें बांटा गया। हालांकि, गंभीर ने पहले ही इस पर सफाई दी थी कि उन्होंने सिर्फ लोगों की मदद करने के लिए यह काम किया था और इसमें उनकी कोई निजी स्वार्थ नहीं थी।
लेकिन अब दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को रोका नहीं जाएगा। यानी गंभीर और उनके फाउंडेशन को इस मामले में कोर्ट की प्रक्रिया का सामना करना होगा।
यह फैसला सामने आने के बाद एक बार फिर से सोशल मीडिया पर गंभीर सुर्खियों में हैं। कई लोग इसे उनके लिए एक बड़ी मुश्किल मान रहे हैं। खासकर इसलिए क्योंकि फिलहाल वह भारतीय टीम के हेड कोच हैं और BCCI के साथ एक अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में उनके ऊपर लगे इस तरह के आरोप उनकी इमेज और करियर पर असर डाल सकते हैं।
गौतम गंभीर का नाम क्रिकेट जगत में एक आक्रामक खिलाड़ी के तौर पर लिया जाता है। उन्होंने भारत को 2007 टी20 वर्ल्ड कप और 2011 वनडे वर्ल्ड कप जिताने में बड़ी भूमिका निभाई थी। संन्यास लेने के बाद गंभीर ने राजनीति में कदम रखा और दिल्ली से सांसद भी बने। इसके बाद उन्होंने क्रिकेट में कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली।
कोविड-19 महामारी के दौरान देशभर में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई थीं। उस वक्त कई राजनेताओं और सामाजिक संस्थाओं ने मदद के लिए आगे बढ़कर दवाइयां, ऑक्सीजन और जरूरी सामान बांटा। गंभीर का फाउंडेशन भी इन्हीं में से एक था, लेकिन बाद में यह मामला उठाया गया कि उन्होंने दवाओं का गलत तरीके से स्टॉक किया और वितरण में नियमों का उल्लंघन किया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अब साफ कर दिया है कि इस मामले की पूरी जांच और ट्रायल होना जरूरी है। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि आने वाले दिनों में गंभीर और उनके फाउंडेशन को कानूनी पेचीदगियों का सामना करना पड़ सकता है।
यह भी गौर करने वाली बात है कि गंभीर का कोचिंग कार्यकाल ऐसे समय में शुरू हुआ है जब भारतीय टीम बड़े टूर्नामेंट्स की तैयारी कर रही है। अगर यह मामला लंबा खिंचता है तो यह उनकी कोचिंग जर्नी पर भी असर डाल सकता है।
सोशल मीडिया पर इस खबर के आते ही फैंस के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। कुछ लोग गंभीर का समर्थन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि उन्होंने सिर्फ महामारी के समय मदद की थी, जबकि कई लोग कह रहे हैं कि अगर अवैध भंडारण हुआ है तो इसकी सच्चाई सामने आनी ही चाहिए।
यह मामला सिर्फ एक क्रिकेटर या कोच से जुड़ा नहीं है, बल्कि एक सार्वजनिक शख्सियत और सांसद से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गूंज संसद और खेल जगत दोनों में सुनाई दे सकती है।