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भारत में जब भी किसी सेलिब्रिटी का रिश्ता बनता है या टूटता है, वह लाखों लोगों की चर्चा का विषय बन जाता है। खासकर जब बात क्रिकेटर्स और फिल्मी हस्तियों की हो, तो यह चर्चा कई गुना ज्यादा हो जाती है। युज़वेंद्र चहल और धनश्री वर्मा का रिश्ता भी इसी श्रेणी में आता है। जब दोनों ने शादी की थी तो सोशल मीडिया पर बधाइयों की बाढ़ आ गई थी। फैंस ने इस रिश्ते को बहुत सराहा था। चहल भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार स्पिनर हैं और धनश्री एक जानी-मानी डांसर और यूट्यूबर। इनकी जोड़ी लोगों को ग्लैमर और टैलेंट का कॉम्बिनेशन लगती थी। लेकिन जब अचानक इनके रिश्ते में दरार आई और तलाक तक नौबत पहुंची तो एक नई कहानी शुरू हुई, और उस कहानी का सबसे काला पहलू था ट्रोलिंग।
तलाक के बाद से ही सोशल मीडिया पर धनश्री वर्मा को लगातार निशाना बनाया गया। जब भी वह डांस करती हुई वीडियो डालतीं, जब भी वह किसी इवेंट में स्पॉट होतीं या अपनी कोई फोटो शेयर करतीं, तो ट्रोलर्स का हुजूम उनके पीछे पड़ जाता। कोई कहता कि वह पैसों के लिए चहल से जुड़ी थीं, कोई कहता कि उन्होंने रिश्ते को धोखा दिया। यह सब बातें बिना किसी सबूत और बिना किसी आधार के फैलाई जातीं। यह ट्रोलिंग केवल उनकी व्यक्तिगत जिंदगी को ही नहीं बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती थी। लेकिन उन्होंने इस पर बड़ा परिपक्व रुख अपनाया। फराह खान के शो में जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अब उन्हें ट्रोलिंग से फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए मैच्योरिटी जरूरी है।
यहां से असली चर्चा शुरू होती है। क्यों हर बार किसी महिला सेलिब्रिटी को ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है? क्यों हमेशा यह माना जाता है कि रिश्ते टूटने की जिम्मेदारी महिला की है? क्यों समाज में पुरुषों की गलतियों पर पर्दा डाल दिया जाता है और महिलाओं पर उंगली उठाई जाती है?
भारतीय समाज में लंबे समय से यह मानसिकता रही है कि रिश्ते को बनाए रखने की जिम्मेदारी महिला पर होती है। यही कारण है कि जब कोई रिश्ता टूटता है, तो सबसे पहले महिला पर सवाल उठाए जाते हैं। धनश्री के साथ भी यही हुआ। उनकी डांसिंग वीडियोज़ और सोशल मीडिया एक्टिविटी को तलाक से जोड़कर देखा गया। मानो उनकी खुशी या उनका काम ही रिश्ते की विफलता का कारण हो। यह सोच न केवल पिछड़ी हुई है बल्कि बेहद हानिकारक भी है।
सोशल मीडिया ने इस मानसिकता को और भी ज्यादा बढ़ावा दिया है। पहले समाज केवल अपने आस-पड़ोस तक सीमित था। अब फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर (अब X) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर हर कोई अपनी राय रखने लगता है। लेकिन समस्या यह है कि यह राय अकसर बिना जानकारी, बिना संवेदनशीलता और बिना जिम्मेदारी के होती है। किसी भी सेलिब्रिटी के निजी रिश्ते पर इस तरह की पब्लिक टिप्पणी करना उनके जीवन में झूठा दबाव डालता है।
अब सवाल यह उठता है कि ट्रोलिंग का असर क्या होता है? मनोविज्ञान के दृष्टिकोण से देखा जाए तो लगातार नकारात्मक टिप्पणियां किसी भी व्यक्ति के आत्मविश्वास को तोड़ सकती हैं। लोग खुद पर शक करने लगते हैं। नींद, मानसिक स्वास्थ्य और काम करने की क्षमता पर इसका असर पड़ता है। सेलिब्रिटीज़ भले ही बाहर से मजबूत दिखें लेकिन अंदर ही अंदर यह उन्हें चोट पहुंचाता है।
धनश्री वर्मा का कहना कि वह अब ट्रोलिंग पर ध्यान नहीं देतीं, यह दर्शाता है कि उन्होंने खुद को इस नकारात्मक माहौल से ऊपर उठाने की कोशिश की है। यह सोच आसान नहीं होती। हर दिन जब आपको हजारों लोग ट्रोल कर रहे हों, तब खुद को मजबूत रखना बहुत मुश्किल होता है। लेकिन यह उनकी मजबूती है कि उन्होंने इस ट्रोलिंग को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
अगर हम भारतीय समाज से बाहर नजर डालें तो यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया भर की महिला सेलिब्रिटीज़ ट्रोलिंग और हेट स्पीच का सामना करती रही हैं। हॉलीवुड की मशहूर गायिका ब्रिटनी स्पीयर्स को उनके निजी जीवन के फैसलों के लिए दशकों तक मीडिया और पब्लिक ने निशाना बनाया। मेगन मार्कल, जो ब्रिटिश शाही परिवार का हिस्सा बनीं, उन्हें लगातार नस्लवादी और लैंगिक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। अमेरिका की सिंगर टेलर स्विफ्ट को भी उनके रिश्तों को लेकर बार-बार ट्रोल किया गया। इन उदाहरणों से साफ है कि यह समस्या वैश्विक है।
सोशल मीडिया कंपनियों की भी जिम्मेदारी बनती है। एल्गोरिद्म अक्सर ऐसी नेगेटिविटी को ज्यादा फैलाता है। जितनी विवादास्पद पोस्ट होगी, उतनी ज्यादा एंगेजमेंट मिलेगी। और कंपनियां इसी एंगेजमेंट से कमाई करती हैं। इस वजह से हेट और ट्रोलिंग वाली बातें ज्यादा फैलती हैं। अगर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स सच में सुरक्षित माहौल बनाना चाहते हैं तो उन्हें हेट स्पीच और पर्सनल अटैक पर कड़े नियम बनाने होंगे।
अब बात आती है कि फैंस की क्या भूमिका होनी चाहिए। फैंस को यह समझना चाहिए कि उनके पसंदीदा खिलाड़ी या कलाकार की निजी जिंदगी पर टिप्पणी करना उनका अधिकार नहीं है। हर इंसान को अपनी पर्सनल लाइफ को जीने का हक है। खेल के मैदान या स्टेज पर जो प्रदर्शन होता है, उसी के आधार पर फैंस को अपना प्यार और आलोचना करनी चाहिए। किसी के निजी रिश्तों पर तंज कसना न केवल गलत है बल्कि अमानवीय भी है।
धनश्री वर्मा की कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमें अपनी मानसिकता और सोशल मीडिया कल्चर को बदलना होगा। हमें यह समझना होगा कि तलाक जीवन का अंत नहीं है, बल्कि कभी-कभी यह एक नई शुरुआत का अवसर होता है। रिश्ते का टूटना दोनों पक्षों की जिम्मेदारी हो सकता है, और कई बार इसमें किसी की गलती नहीं होती बल्कि परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि अलग होना ही बेहतर होता है।
आज की युवा पीढ़ी को धनश्री जैसे उदाहरणों से सीख लेनी चाहिए। अगर आप सोशल मीडिया पर हैं तो आपको ट्रोलिंग का सामना करना पड़ सकता है। जरूरी है कि आप खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाएं और नेगेटिविटी को ज्यादा महत्व न दें। साथ ही अगर आप दूसरों को ट्रोल करते हैं तो यह भी सोचें कि आपके शब्द किसी की जिंदगी पर गहरा असर डाल सकते हैं।
अगर हम इसे एक बड़े सामाजिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो यह समय है जब हमें रिश्तों को लेकर अपनी सोच बदलनी होगी। हमें यह मानना होगा कि एक महिला भी उतनी ही स्वतंत्र है जितना कि एक पुरुष। उसे अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का पूरा अधिकार है। तलाक होने पर उसे गुनहगार ठहराना बंद करना होगा। तभी हम एक सच्चे आधुनिक समाज की ओर बढ़ पाएंगे।
धनश्री वर्मा का यह संदेश कि वह अब ट्रोलिंग पर ध्यान नहीं देतीं, हमें यही सिखाता है कि जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए हमें दूसरों की नकारात्मक बातों से ऊपर उठना होगा। यही उनकी असली जीत है और यही हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और आलोचना का सामना करता है।