अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को नए अमेरिका-जापान व्यापार समझौते को लागू करने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके दोनों देशों के रिश्तों में नई दिशा दे दी। व्हाइट हाउस से जारी बयान के अनुसार यह आदेश अमेरिका-जापान व्यापार संबंधों के एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। इस फैसले से वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर बड़ा असर पड़ सकता है क्योंकि जापान अमेरिका का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था आपस में गहराई से जुड़ी हुई है।
ट्रंप के आदेश के मुताबिक अब जापान से अमेरिका में आने वाले लगभग सभी आयातित उत्पादों पर 15 फीसदी का बेसलाइन टैरिफ लगाया जाएगा। हालांकि कुछ महत्वपूर्ण सेक्टर्स को इस दायरे से छूट दी गई है। इनमें ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स, एयरोस्पेस प्रोडक्ट्स, जेनेरिक दवाएं और घरेलू स्तर पर उपलब्ध न होने वाले प्राकृतिक संसाधन शामिल हैं। यह छूट अमेरिकी उद्योगों और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए दी गई है ताकि बाजार में आवश्यक उत्पादों की कमी या कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी न हो।
विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। ट्रंप प्रशासन लंबे समय से “मेड इन अमेरिका” अभियान पर जोर देता रहा है और विदेशी आयातों पर टैरिफ लगाकर घरेलू उत्पादन को प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि आलोचकों का तर्क है कि इस तरह के टैरिफ से उपभोक्ताओं को महंगे दाम चुकाने पड़ेंगे और इससे महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है।
जापान ने इस फैसले पर संयमित प्रतिक्रिया दी है। टोक्यो ने कहा है कि वह इस समझौते को दोनों देशों के लिए लाभकारी मानता है और भविष्य में भी आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में काम करेगा। जापानी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए हैं कि कुछ मुद्दों पर वह वॉशिंगटन के साथ आगे बातचीत करेंगे ताकि टैरिफ से प्रभावित होने वाले सेक्टर्स को राहत मिल सके।
ट्रंप ने आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि यह समझौता अमेरिकी किसानों, मजदूरों और उद्योगों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। उन्होंने दावा किया कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और लंबे समय में व्यापार घाटा कम होगा।
इस फैसले का असर वैश्विक बाजारों में भी दिखने लगा है। एशियाई स्टॉक मार्केट्स में हल्की गिरावट देखने को मिली, वहीं अमेरिकी शेयर बाजार में कुछ कंपनियों के स्टॉक्स में तेजी आई है जो घरेलू उत्पादन से जुड़ी हैं। खासकर ऑटोमोबाइल और फार्मास्यूटिकल कंपनियों को इससे फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-जापान के बीच इस नए समझौते से चीन और यूरोप के साथ चल रहे व्यापारिक रिश्तों पर भी असर पड़ेगा। ट्रंप प्रशासन पहले से ही चीन पर टैरिफ लगाकर दबाव बना चुका है और अब जापान के साथ भी व्यापारिक नियमों में बदलाव ने संकेत दे दिया है कि अमेरिका अपनी व्यापार नीति में आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।
कुल मिलाकर, यह फैसला वैश्विक व्यापार परिदृश्य में एक बड़े बदलाव की शुरुआत है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में जापान और अमेरिका के बीच इस समझौते का वास्तविक प्रभाव कैसा रहता है और क्या यह दोनों देशों के लिए वाकई फायदेमंद साबित होगा या फिर इससे नई चुनौतियां खड़ी होंगी।