बसंत पंचमी का त्योहार ज्ञान, संगीत और वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है और लोग नए कार्यों की शुरुआत करते हैं। लेकिन 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी के मौके पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा तंज कसा। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार को किसी को ‘स्नान’ या ‘दान’ से नहीं रोकना चाहिए और सदियों पुरानी सनातनी परंपराओं को बाधित नहीं करना चाहिए। अखिलेश का यह तंज प्रयागराज में चल रहे माघ मेला में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुई घटना से जुड़ा लगता है, जहां प्रशासन ने उनके पालकी को रोका था। इस ब्लॉग पोस्ट में हम इस पूरे मामले की विस्तार से चर्चा करेंगे – अखिलेश के बयान, पृष्ठभूमि, राजनीतिक प्रभाव और जनता की प्रतिक्रियाएं।
बसंत पंचमी का महत्व और माघ मेला का संदर्भ
बसंत पंचमी माघ महीने की शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है। प्रयागराज में माघ मेला के दौरान यह एक प्रमुख स्नान का दिन होता है। लाखों श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाते हैं और दान-पुण्य करते हैं। लेकिन इस साल माघ मेला विवादों से घिरा रहा। 22 जनवरी को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पालकी को प्रशासन ने रोक दिया, जिससे सनातनी समुदाय में नाराजगी फैल गई। अखिलेश यादव ने इसे ‘धर्म विरोधी’ करार दिया और कहा कि सत्ता में बैठे लोग अधर्म कर रहे हैं, जो कलियुग का संकेत है।
23 जनवरी को बसंत पंचमी के दिन अखिलेश ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर दो पोस्ट किए। पहली पोस्ट सुबह 3:10 बजे मां सरस्वती की खूबसूरत तस्वीर के साथ थी, जिसमें उन्होंने लिखा: “न किसीको ‘स्नान’ से रोकें, न किसीको ‘दान’ से रोकें सदियों से जो चलती आई, वो सनातनी-सरिता न रोकें! भाजपा जाए तो संस्कार बच पाए!” इस पोस्ट में सरस्वती की तस्वीर एक कमल पर विराजमान देवी की है, जो त्योहार की भावना को दर्शाती है।
दूसरी पोस्ट सुबह 8:34 बजे थी, जिसमें माघ मेला में दूध वितरण की तस्वीर थी – एक व्यक्ति बड़े बर्तन में दूध डाल रहा है, पृष्ठभूमि में समाजवादी पार्टी के बैनर। कैप्शन वही था। यह तंज सीधे भाजपा सरकार पर था, जो अखिलेश के अनुसार सनातनी परंपराओं को बाधित कर रही है।
घटना की पृष्ठभूमि: शंकराचार्य की पालकी रोकी गई
यह तंज प्रयागराज माघ मेला में 22 जनवरी को हुई घटना से जुड़ा है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपनी पालकी में जा रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। शंकराचार्य के समर्थकों का आरोप है कि पुलिस ने महिलाओं और बच्चों के साथ बदसलूकी की, जूते से पीटा और गिरफ्तार किया। एक वीडियो में एक महिला डॉक्टर कह रही है कि पुलिस ने 10 साल के बच्चों को जूते से मारा और उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए। महिला कहती है, “ये पुलिसकर्मी संविधान की शपथ लेते हैं… वे 10 साल के बच्चों को जूते से मारेंगे? इन्हें जेल जाना चाहिए!”
अखिलेश ने इस पर पोस्ट किया: “सत्ताधारी दंभ छोड़ें और तत्काल माफ़ी माँगे! कहीं ये विवाद ‘हाता नहीं भाता’ का प्रयागराज तक विस्तार तो नहीं?” ‘हाता नहीं भाता’ शायद किसी पुरानी घटना का संदर्भ है, जहां सरकार ने धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप किया। अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगी ‘सनातन धर्म’ का अपमान कर रहे हैं, जिससे सनातनी समुदाय में रोष है।
अखिलेश का राजनीतिक रुख: भाजपा पर लगातार हमला
अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार पर लगातार हमलावर हैं। हाल ही में उन्होंने मतदाता सूची में कटौती, बेरोजगारी और महंगाई पर भी तंज कसे हैं। माघ मेला विवाद को वे धार्मिक मुद्दे से जोड़कर भाजपा को ‘धर्म विरोधी’ बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में अधर्म होने से कलियुग आता है। बसंत पंचमी पर यह तंज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह धार्मिक त्योहार पर राजनीतिक हमला है, जो हिंदू वोटर्स को प्रभावित कर सकता है।
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, और अखिलेश PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इस घटना से वे सनातनी समुदाय की नाराजगी को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और विवाद
उत्तर प्रदेश सरकार ने आरोपों को खारिज किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि माघ मेला सुचारू रूप से चल रहा है और कोई हस्तक्षेप नहीं है। लेकिन शंकराचार्य के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें महिलाओं ने पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाया। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से पालकी रोकी, लेकिन यह विवाद बढ़ गया।
सोशल मीडिया पर #MaghMela #Shankaracharya ट्रेंड कर रहे हैं। कई यूजर्स अखिलेश के तंज का समर्थन कर रहे हैं, जबकि भाजपा समर्थक इसे राजनीतिक स्टंट बता रहे हैं।
जनता की प्रतिक्रियाएं
अखिलेश की पोस्ट पर हजारों लाइक्स और रीपोस्ट आए। एक यूजर ने लिखा: “अखिलेश जी सही कह रहे हैं, भाजपा धर्म को राजनीति में घसीट रही है।” दूसरी तरफ, “यह बस चुनावी स्टंट है।” बसंत पंचमी पर लाखों लोगों ने गंगा स्नान किया, लेकिन विवाद ने त्योहार की रौनक फीकी कर दी।
निष्कर्ष
बसंत पंचमी पर अखिलेश यादव का तंज भाजपा सरकार पर तीखा हमला है, जो धार्मिक स्वतंत्रता और परंपराओं को मुद्दा बनाता है। माघ मेला विवाद से जुड़ा यह बयान राजनीतिक गलियारों में गूंज रहा है। क्या यह चुनावी मुद्दा बनेगा? समय बताएगा। लेकिन इतना तय है कि त्योहारों पर राजनीति ने फिर से बहस छेड़ दी है। सभी को बसंत पंचमी की शुभकामनाएं – ज्ञान और शांति फैले!