दुनिया की बढ़ती भू-राजनीतिक तनावों के बीच BRICS Plus देशों ने एक बड़ा कदम उठाया है। 10 जनवरी 2026 (शनिवार) से दक्षिण अफ्रीका के समुद्री क्षेत्र में रूस, चीन और ईरान के साथ अन्य BRICS Plus सदस्यों का संयुक्त नौसैनिक अभ्यास ‘Will for Peace 2026’ शुरू हो गया। यह अभ्यास 9 से 16 जनवरी तक चलेगा और इसका मकसद समुद्री सुरक्षा, शिपिंग की सुरक्षा और समुद्री आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करना बताया जा रहा है। दक्षिण अफ्रीका ने इसे BRICS Plus ऑपरेशन करार दिया है, जबकि चीन इसकी लीड कर रहा है। आइए, इस महत्वपूर्ण घटना को विस्तार से समझते हैं।
अभ्यास की मुख्य डिटेल्स
- नाम: Exercise Will for Peace 2026
- स्थान: दक्षिण अफ्रीका के सिमन्स टाउन नेवल बेस (केप टाउन के पास) और आसपास के समुद्री क्षेत्र (False Bay)
- अवधि: 9-16 जनवरी 2026 (एक सप्ताह)
- मुख्य भागीदार:
- चीन (लीडर): Type 052C डिस्ट्रॉयर (जैसे Changchun) और सपोर्ट शिप
- रूस: Corvette Stoikiy (रूसी जहाज)
- ईरान: डिस्ट्रॉयर Jamaran और फॉरवर्ड बेस शिप Mahdavai
- दक्षिण अफ्रीका: फ्रिगेट और होस्ट
- अन्य: UAE (कोर्वेट), ब्राजील, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया आदि ऑब्जर्वर या भागीदार के रूप में
- उद्देश्य: जॉइंट मैरीटाइम सेफ्टी ऑपरेशंस, इंटरऑपरेबिलिटी ड्रिल्स, मैरीटाइम प्रोटेक्शन और शिपिंग सुरक्षा।
यह अभ्यास पहले Exercise MOSI सीरीज का हिस्सा था, लेकिन ईरान के BRICS Plus में शामिल होने के बाद नाम बदला गया।
BRICS Plus का बैकग्राउंड और महत्व
BRICS (ब्राजील, रूस, इंडिया, चीन, साउथ अफ्रीका) अब BRICS Plus बन चुका है, जिसमें ईरान, सऊदी अरब, UAE, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया जैसे नए सदस्य शामिल हैं। यह ग्रुप खुद को वेस्टर्न (खासकर अमेरिकी) प्रभाव के काउंटरवेट के रूप में देखता है।
- यह पहला ऐसा बड़ा डिफेंस कोऑपरेशन है जो BRICS Plus के तहत हो रहा है।
- दक्षिण अफ्रीका ने इसे नॉन-पॉलिटिकल बताया है, लेकिन ग्लोबल टेंशन (रूस-यूक्रेन, ईरान-US, चीन-US) के बीच इसे शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है।
- दक्षिण अफ्रीका ने डिफेंड किया: “यह मैरीटाइम इकोनॉमिक एक्टिविटीज की सुरक्षा के लिए जरूरी है।”
अमेरिका और वेस्टर्न दुनिया की प्रतिक्रिया
- ट्रंप प्रशासन के साथ पहले से तनाव: ट्रंप ने BRICS को “anti-American” कहा है।
- दक्षिण अफ्रीका-US संबंध पहले से खराब हैं (ट्रंप की टैरिफ धमकियां, रूसी तेल आयात)।
- यह अभ्यास US के साथ और टेंशन बढ़ा सकता है, खासकर जब US ने रूसी ऑयल टैंकर जब्त किया।
- कुछ में इसे रूस-चीन-ईरान की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का संकेत माना जा रहा है।
भारत का रोल?
भारत BRICS का मूल सदस्य है, लेकिन इस अभ्यास में भारत की सक्रिय भागीदारी की कोई स्पष्ट खबर नहीं है। भारत QUAD (US, जापान, ऑस्ट्रेलिया के साथ) में भी है, इसलिए वो बैलेंस बनाए रख रहा है। BRICS में भारत सक्रिय है, लेकिन सैन्य अभ्यासों में सतर्क रहता है।
यह अभ्यास वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव दिखाता है – BRICS Plus अब सिर्फ इकोनॉमिक नहीं, बल्कि सुरक्षा और मिलिट्री कोऑपरेशन में भी आगे बढ़ रहा है। क्या यह नई मल्टीपोलर वर्ल्ड की शुरुआत है या सिर्फ रूटीन ड्रिल? आप क्या सोचते हैं – भारत को इसमें ज्यादा सक्रिय होना चाहिए? कमेंट्स में बताएं! 🌍⚓ #BRICSPlus #WillForPeace2026 #RussiaChinaIran #NavalExercise