एक समय देश के सबसे प्रतिष्ठित बैंकिंग चेहरों में गिनी जाने वाली चंदा कोचर एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह है एक 65 करोड़ रुपये के रिश्वत घोटाले में दोषी करार दिया जाना। यह घोटाला साल 2008 से जुड़ा है, जब चंदा कोचर ICICI बैंक की CEO थीं। उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए वीडियोकॉन ग्रुप को हजारों करोड़ का लोन पास कराया, और उसके बदले 64 करोड़ रुपये उनके पति दीपक कोचर की कंपनी को ट्रांसफर किए गए।
मामला क्या है?
साल 2008 में ICICI बैंक ने वीडियोकॉन समूह को करीब 3250 करोड़ रुपये का लोन मंजूर किया। यह लोन उस वक्त दिए गए थे जब वीडियोकॉन की टेलिकॉम यूनिट को फंडिंग की आवश्यकता थी। इस लोन की सिफारिश खुद बैंक की तत्कालीन CEO चंदा कोचर ने की थी।
कुछ समय बाद यह सामने आया कि उसी दौरान चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी नूपावर रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड (NRPL) को 64 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की गई थी। यह ट्रांसफर वीडियोकॉन ग्रुप के प्रमुख वेणुगोपाल धूत से जुड़ी कंपनियों के माध्यम से हुआ था।

ट्रिब्यूनल का क्या कहना है?
नई दिल्ली स्थित अपीलीय वित्तीय ट्रिब्यूनल ने हाल ही में इस मामले की सुनवाई में स्पष्ट किया कि यह “क्विड प्रो को” यानी “सेवा के बदले लाभ” का स्पष्ट मामला है। उन्होंने कहा कि यह रिश्वत थी जो लोन पास कराने के बदले दी गई।
ट्रिब्यूनल ने माना कि NRPL पर मालिकाना हक भले ही दस्तावेजों में वेणुगोपाल धूत का दिखाया गया हो, लेकिन संचालन और नियंत्रण दीपक कोचर के पास था। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि लोन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं थी और इसमें हितों का टकराव साफ दिखता है।
पूरी स्कीम किस तरह रची गई थी?
- लोन पास किया गया – ICICI बैंक ने वीडियोकॉन ग्रुप को 3250 करोड़ रुपये का कर्ज दिया।
- राशि ट्रांसफर – इसके कुछ महीनों बाद वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने 64 करोड़ रुपये NRPL को ट्रांसफर किए।
- कंपनी स्ट्रक्चर का इस्तेमाल – NRPL पर दस्तावेजों में मालिकाना हक किसी और का दिखाया गया, लेकिन असल में दीपक कोचर इसका नियंत्रण संभाले हुए थे।
- फायदे का लेन-देन छिपाया गया – इस ट्रांजैक्शन को वैध बिजनेस डील के रूप में दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन जांच में सच्चाई सामने आ गई।
CBI ने भी की थी एफआईआर
इस मामले में साल 2019 में CBI ने चंदा कोचर, दीपक कोचर, वेणुगोपाल धूत और अन्य से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों में FIR दर्ज की थी। FIR में नूपावर रिन्यूएबल्स, सुप्रीम एनर्जी, वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स और वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के नाम प्रमुख रूप से शामिल थे।

चंदा कोचर की गिरफ़्तारी और जमानत
2022 के अंत में CBI ने चंदा कोचर और दीपक कोचर को गिरफ्तार भी किया था। कुछ समय बाद उन्हें अदालत से जमानत मिल गई, लेकिन मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में चल रहा है।
अब आगे क्या?
अपीलीय ट्रिब्यूनल द्वारा दोषी ठहराया जाना ICICI बैंक के कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। साथ ही यह मामला इस बात की मिसाल बन सकता है कि कैसे बड़े पदों पर बैठे अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर निजी फायदे उठा सकते हैं।
अब इस केस का असर और भी व्यापक हो सकता है:
- SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) इस पर अलग से कार्रवाई कर सकता है
- बैंकिंग रेगुलेटर्स और RBI भी कड़े कदम उठा सकते हैं
- सरकार द्वारा कंपनी लॉ और बैंकों के कामकाज की पारदर्शिता को लेकर नई सख्ती संभव है