जम्मू-कश्मीर में सर्दियों की दस्तक के साथ ही पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों की नापाक साजिशें फिर से सामने आ रही हैं। खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि ISI की मदद से लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे संगठन LoC पार से बड़े पैमाने पर घुसपैठ कराने की कोशिश कर रहे हैं। सर्दियों में बर्फबारी से पहले आतंकी घाटी में दाखिल होकर बड़े हमले करने की फिराक में हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बावजूद पाकिस्तान ने PoK में कई लॉन्च पैड फिर से सक्रिय कर दिए हैं। भारतीय सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद हैं और कई घुसपैठ की कोशिशें नाकाम कर चुके हैं।
सर्दियों से पहले घुसपैठ की कोशिशें क्यों बढ़ीं?
सर्दियां शुरू होने से पहले नवंबर-दिसंबर का समय आतंकियों के लिए ‘गोल्डन पीरियड’ माना जाता है। बर्फबारी से हाई एल्टीट्यूड पास बंद हो जाते हैं, इसलिए पाकिस्तान आतंकियों को जल्दी से जल्दी घुसपैठ कराने की कोशिश करता है। इस बार खुफिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि सितंबर 2025 से LoC पर घुसपैठ, ड्रोन रेकी और लॉजिस्टिक सपोर्ट में तेजी आई है। LeT और JeM के कई यूनिट्स ISI और पाकिस्तान की स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) की मदद से घाटी में दाखिल हो चुके हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, PoK के कोटली क्षेत्र में अक्टूबर में ISI अधिकारियों, जमात-ए-इस्लामी और हिजबुल मुजाहिदीन के सदस्यों की गुप्त मीटिंग हुई, जहां स्लीपर सेल्स को एक्टिवेट करने और ऑपरेशन सिंदूर के नुकसान की भरपाई करने की योजना बनी। पाकिस्तान के बॉर्डर एक्शन टीम्स (BAT) भी फिर से तैनात किए गए हैं, जो क्रॉस-बॉर्डर रेड्स के लिए जाने जाते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट
2025 में पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसमें PoK और पाकिस्तान में कई टेरर कैंप्स को नेस्तनाबूद कर दिया गया। इस ऑपरेशन से LeT और JeM को बड़ा झटका लगा। अब पाकिस्तान बदला लेने के लिए सर्दियों में बड़े हमले प्लान कर रहा है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, 131 एक्टिव टेररिस्ट्स में से 122 पाकिस्तानी हैं, जो चिनाब वैली और पीर पंजाल क्षेत्र में सक्रिय हैं।
ISI ने 15 टेरर कैंप्स फिर से शुरू किए हैं। ड्रोन से LoC की कमजोर जगहों की रेकी की जा रही है, ताकि फिदायीन हमले या हथियार ड्रॉप किए जा सकें। दिल्ली, मुंबई, हरियाणा और यूपी जैसे राज्यों में भी अलर्ट जारी किया गया है।
सुरक्षा बलों की मुस्तैदी: कई घुसपैठ नाकाम
भारतीय सेना और BSF पूरी तरह अलर्ट पर हैं। नवंबर में उरी सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश नाकाम की गई। केरन सेक्टर में दो आतंकी मारे गए। BSF के IG अशोक यादव ने कहा कि कुछ लॉन्च पैड्स अभी भी सक्रिय हैं, लेकिन हमारी काउंटर-इनफिल्ट्रेशन ग्रिड मजबूत है।
सुरक्षा बलों ने ड्रोन काउंटर मेजर्स, रडार मॉनिटरिंग और एरियल सर्वेलेंस बढ़ा दिया है। नॉर्दर्न कमांड को अतिरिक्त पेट्रोलिंग के निर्देश दिए गए हैं। लोकल रिक्रूटमेंट जीरो होने के बावजूद फॉरेन टेररिस्ट्स की घुसपैठ चिंता का विषय है।
पाकिस्तान की पुरानी आदत: सर्दियों में आतंक का खेल
पाकिस्तान सालों से सर्दियों से पहले घुसपैठ कराता रहा है। 2025 में भी यही पैटर्न दिख रहा है। खुफिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ISI स्लीपर सेल्स को एक्टिवेट कर रही है और नारको-फाइनेंस्ड इंसर्जेंसी को बढ़ावा दे रही है। व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल्स भी सामने आए हैं, जहां प्रोफेशनल्स रेडिकलाइज होकर टेरर एक्टिविटीज में शामिल हो रहे हैं।
भारत की मजबूत तैयारी
भारतीय सुरक्षा बलों ने मल्टी-प्रॉन्ग्ड स्ट्रेटजी अपनाई है – काउंटर इंसर्जेंसी ग्रिड मजबूत करना, रीयल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग, CASO ऑपरेशंस और मॉडर्न इक्विपमेंट का इस्तेमाल। जम्मू-कश्मीर में शांति बहाल करने के प्रयासों को पटरी से उतारने की पाकिस्तान की कोशिशें नाकाम हो रही हैं।
सर्दियां आते ही LoC पर चुनौतियां बढ़ जाती हैं – घना कोहरा, बर्फ और कम विजिबिलिटी आतंकियों के लिए फायदेमंद होती है, लेकिन हमारे जवान हर हाल में मुस्तैद रहते हैं।
क्या आपको लगता है कि ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाइयां पाकिस्तान को सबक सिखा रही हैं? कमेंट्स में बताएं! 🇮🇳🛡️
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