सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मशहूर यूट्यूबर और शिक्षक खान सर यह दावा करते नजर आ रहे हैं कि अगर अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते खराब हो गए तो गूगल भारत में अपनी सेवाएं बंद कर सकता है। उनका कहना है कि जीमेल जैसी सेवाओं के ठप होने से भारत में मोबाइल नेटवर्क, डिजिटल पेमेंट और कई जरूरी सुविधाएं रुक जाएंगी। इस बयान के बाद से सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है और लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या वाकई ऐसा हो सकता है या फिर यह सिर्फ एक काल्पनिक दावा है।
खान सर के इस बयान को समझने के लिए पहले हमें यह देखना होगा कि भारत में डिजिटल इकोसिस्टम किस तरह काम करता है और गूगल की भूमिका उसमें कितनी अहम है। भारत दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट बाजारों में से एक है और गूगल यहां करोड़ों यूजर्स को जीमेल, यूट्यूब, गूगल पे, गूगल मैप्स और एंड्रॉयड जैसे प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है। एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर ही भारत के लगभग 95% स्मार्टफोन चलते हैं। इस वजह से यह दावा करना आसान हो जाता है कि गूगल सेवाएं रुकने पर भारत पर बड़ा असर पड़ सकता है।
लेकिन असलियत थोड़ी अलग है। जीमेल सिर्फ एक ईमेल सेवा है। यह मोबाइल नेटवर्क, कॉलिंग या इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) से सीधा जुड़ा नहीं है। अगर गूगल अपनी ईमेल सेवा भारत में बंद भी कर दे तो इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क चलते रहेंगे। हां, उन यूजर्स और कंपनियों को मुश्किल हो सकती है जो अपने रोज़ाना कामकाज के लिए जीमेल और गूगल ड्राइव पर निर्भर हैं।
मोबाइल सर्विसेस और इंटरनेट कनेक्टिविटी पूरी तरह से भारतीय टेलीकॉम कंपनियों और सरकारी रेगुलेटरी बॉडीज़ पर निर्भर करती है। जियो, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और बीएसएनएल जैसी कंपनियां भारत में नेटवर्क उपलब्ध कराती हैं और इनका संचालन गूगल से अलग है। इसलिए जीमेल बंद होने से मोबाइल कॉलिंग या डेटा सेवाएं रुक जाएंगी, यह दावा पूरी तरह गलत है।
हालांकि यह सच है कि गूगल पर भारत का डिजिटल इकोसिस्टम बहुत हद तक निर्भर है। भारत की बड़ी संख्या में कंपनियां क्लाउड स्टोरेज, गूगल वर्कस्पेस, गूगल पेमेंट सिस्टम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करती हैं। अगर किसी कारणवश गूगल भारत में अपनी सेवाएं बंद कर दे तो डिजिटल बिज़नेस, स्टार्टअप्स और शिक्षा सेक्टर पर बड़ा असर पड़ेगा।
गूगल का भारत में इतना बड़ा मार्केट शेयर है कि उसे यहां से हटना खुद उसके लिए घाटे का सौदा होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक गूगल को भारत से हर साल अरबों डॉलर का राजस्व मिलता है। ऐसे में यह सोचना कि अमेरिका-भारत संबंधों में खटास आते ही गूगल अपनी सेवाएं बंद कर देगा, व्यावहारिक नहीं लगता। गूगल एक प्राइवेट कंपनी है और उसका सीधा संचालन अमेरिकी सरकार के अधीन नहीं है।
खान सर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल जरूर हो गया है, लेकिन इसमें कही गई कई बातें तकनीकी दृष्टि से सही नहीं हैं। यह सच है कि डिजिटल दुनिया में अमेरिका की टेक कंपनियों का दबदबा बहुत बड़ा है और भारत को लंबे समय से इस निर्भरता को कम करने के लिए ‘डिजिटल आत्मनिर्भरता’ की दिशा में काम करना चाहिए। भारत सरकार ने भी इसी वजह से कई घरेलू ऐप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा देने की पहल की है।
उदाहरण के लिए भारत ने आधार, यूपीआई और डिजिलॉकर जैसे प्लेटफॉर्म्स विकसित किए हैं, जिनका इस्तेमाल दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा प्रभावी ढंग से किया जा रहा है। यूपीआई आज भारत की सबसे बड़ी ताकत है और इसका सीधा कोई विकल्प अमेरिका के पास भी नहीं है। अगर गूगल पे भारत में काम करना बंद कर भी दे तो भी यूपीआई के जरिए डिजिटल पेमेंट जारी रह सकते हैं।
साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत को डेटा स्टोरेज और डिजिटल सेवाओं में स्वदेशी विकल्प तैयार करने की जरूरत है। इससे न सिर्फ विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम होगी बल्कि देश की डिजिटल संप्रभुता भी मजबूत होगी।
कुल मिलाकर, खान सर का यह दावा कि जीमेल बंद होने से भारत की मोबाइल सेवाएं ठप हो जाएंगी, तकनीकी रूप से सही नहीं है। लेकिन यह जरूर सच है कि भारत को अभी भी गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न जैसी विदेशी कंपनियों पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बहुत ज्यादा निर्भर रहना पड़ता है। यही कारण है कि भारत के लिए डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से कदम उठाना बेहद जरूरी है।