Russia's President Vladimir Putin speaks during a plenary session of the St. Petersburg International Economic Forum (SPIEF) in Saint Petersburg, Russia, June 20, 2025. REUTERS/Anton Vaganov
दक्षिण एशिया में बढ़ते भारत-बांग्लादेश तनाव के बीच रूस ने बड़ा बयान देकर सबको चौंका दिया है! बांग्लादेश में रूसी राजदूत अलेक्जेंडर ग्रिगोरिविच खोजिन ने ढाका से अपील की है कि भारत के साथ चल रहे तनाव को जितनी जल्दी कम किया जाए, उतना ही बेहतर होगा। उन्होंने 1971 के मुक्ति संग्राम को याद दिलाते हुए कहा कि बांग्लादेश की आजादी में भारत की मुख्य भूमिका थी और रूस ने भी उसका समर्थन किया था। तीनों देशों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले, दीपू चंद्र दास की लिंचिंग और राजनीतिक अस्थिरता से दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हो गए हैं।
रूसी राजदूत का स्पष्ट संदेश: क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी है शांति
22 दिसंबर 2025 को ढाका में रूसी दूतावास में सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजदूत खोजिन ने कहा, “तनाव को जितनी जल्दी कम किया जाए… उतना बेहतर। क्योंकि ऐतिहासिक रूप से 1971 में जब बांग्लादेश को आजादी मिली, तो मुख्य रूप से भारत की मदद से मिली थी। रूस ने भी इसका समर्थन किया था। भारत, बांग्लादेश और रूस ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।” उन्होंने जोर दिया कि पड़ोसी देशों के रिश्ते आपसी भरोसे और विश्वास पर आधारित होने चाहिए। रूस दोनों देशों के द्विपक्षीय मामलों में दखल नहीं देना चाहता, लेकिन मौजूदा तनाव को और बढ़ने से रोकना समझदारी होगी।
यह बयान बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के लिए एक कूटनीतिक संदेश जैसा है। राजदूत ने बांग्लादेश में आगामी 12 फरवरी 2026 के चुनाव से पहले अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत भी बताई। रूस बांग्लादेश के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ा रहा है – 2025 में 20 लाख टन गेहूं निर्यात, उर्वरक सप्लाई और रूपपुर न्यूक्लियर प्रोजेक्ट में प्रगति। लेकिन क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भारत से अच्छे रिश्ते जरूरी हैं।
तनाव की जड़: हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले और राजनीतिक अस्थिरता
शेख हसीना के अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में अस्थिरता बढ़ी है। यूनुस की अंतरिम सरकार पर अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं की सुरक्षा न कर पाने के आरोप लग रहे हैं। हालिया घटना – मयमनसिंह में 25 साल के हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा लिंचिंग और जलाकर हत्या – ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। आरोप ब्लास्फेमी का था, लेकिन यह हसीना के जाने के बाद हिंदुओं पर हमलों की श्रृंखला का हिस्सा लगता है।
भारत में इसके खिलाफ बड़े प्रदर्शन हुए – दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड तोड़े, पुलिस से झड़प हुई। कोलकाता में भी विरोध प्रदर्शन। भारत ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जताई है। बांग्लादेश ने भारत पर आरोप लगाए, लेकिन रूस ने स्पष्ट रूप से दोनों पक्षों से संयम बरतने को कहा।
1971 की याद: रूस का ऐतिहासिक संदर्भ क्यों महत्वपूर्ण?
राजदूत ने 1971 का जिक्र जानबूझकर किया। बांग्लादेश की आजादी में भारत ने निर्णायक भूमिका निभाई – पाकिस्तानी सेना का सरेंडर भारतीय फौजों के सामने हुआ। सोवियत संघ (अब रूस) ने तब भारत का समर्थन किया, अमेरिका-पाकिस्तान गठबंधन के खिलाफ। यह याद दिलाना बांग्लादेश को संकेत है कि भारत से दुश्मनी ऐतिहासिक दोस्ती के खिलाफ है। रूस खुद बांग्लादेश में मजबूत पकड़ रखता है – रूपपुर न्यूक्लियर प्लांट, हथियार सप्लाई, अनाज निर्यात। वह नहीं चाहता कि क्षेत्र में अस्थिरता से उसके हित प्रभावित हों।
भारत के लिए रूस का यह बयान क्यों अहम?
रूस भारत का पुराना सहयोगी है – ब्रिक्स, एससीओ, रक्षा सौदे। लेकिन बांग्लादेश में भी उसके बड़े हित हैं। यह बयान संतुलित है – न भारत की आलोचना, न बांग्लादेश की। बल्कि दोनों से डी-एस्केलेशन की अपील। भारत के लिए यह सकारात्मक है क्योंकि रूस ने बांग्लादेश को 1971 की दोस्ती याद दिलाई। यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की चिंता को समर्थन मिल रहा है।
बांग्लादेश में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भी हिंसा भड़की, जिसमें भारत विरोधी नारे लगे। यूनुस सरकार पर कट्टरपंथियों को शह देने के आरोप हैं। ऐसे में रूस का बयान क्षेत्रीय शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
आगे क्या?
बांग्लादेश में फरवरी 2026 के चुनाव से पहले स्थिरता जरूरी है। भारत अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर नजर रखेगा। रूस जैसे देशों की मध्यस्थता से बातचीत का रास्ता खुल सकता है। लेकिन अगर हमले जारी रहे, तो तनाव और बढ़ेगा।
रूस का यह बयान दिखाता है कि दक्षिण एशिया की स्थिरता वैश्विक हित में है। उम्मीद है दोनों देश संयम बरतें और 1971 की दोस्ती को नए सिरे से मजबूत करें।
क्या आपको लगता है रूस का यह बयान भारत-बांग्लादेश रिश्तों को सुधारने में मदद करेगा? कमेंट्स में बताएं! 🇮🇳🇧🇩🇷🇺
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